लेखिका - शालू रानी
हेलो दोस्तों,, मैं आपकी प्यारी शालू,, पिछली स्टोरी में मैंने आपको बताया की कैसे मुझे पापा के दो दोस्तों ने मेरे घर में ही चोद डाला था,,, और मुझे असली मर्द के लंड का एहसास करवाया था,, वो दोनों अंकल रोज ही हमारे घर आते और पापा से चोरी कभी मेरे बूब्स दबा देते,, कभी मेरे चूतड़ों को मसल देते और चूमा चाटी कर लेते,, कभी कभी तो मैं उनका लंड भी अपने मुंह में डाल कर चूस लेती,,
तीन चार दिन ऐसे ही
बीत गए,,, एक दिन खन्ना अंकल पापा से चोरी मेरे कमरे में आये और मुझे अपनी
बाहों में लेते हुए बोले - क्या हाल है मेरी शालू रानी,,,
मैंने भी अंकल के होंठों को पास अपने होंठ लेजाते हुए कहा - ठीक हूँ अंकल,, आप कैसे हो,,,,
अंकल
ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा - क्या बताऊं जानेमन ,, तुम्हारे बिना
तड़प रहें हैं ,,, फिर से तुम्हारी चुदाई करने का मन हो रहा है,,,
मैंने मुस्कराते हुए कहा - तो कर लो ना अंकल,, मेरी चूत भी तड़प रही है आपके लंड लेने को,,,
खन्ना
अंकल ने मेरी चूत पर अपने लंड का दबाव बनाते हुए और मुझे अपनी बाहों में
कस्ते हुए कहा - वो ही तो बताने आया हूँ मेरी शालू डार्लिंग,,, कल सारा दिन
तुमको चोदने का प्लैन है,,,,
मैंने कहा - कल,, क्या प्लैन हैं ,,, मुझे भी बता दो,, ताकि मैं भी चूत की झांट की सफाई करके रखूं,,,,
अंकल
बोले - हाँ हाँ,,, मेरी रानी,, बिलकुल अच्छी तरह से अपनी चूत को साफ़ कर
लेना,, तेरी चूत को चाट चाट कर तेरा सारा माल पियूँगा कल,,
मैंने मुस्कराते हुए कहा - ठीक है ,,,, मगर प्लैन भी बताओ,,,, क्या है,,, प्लैन
खन्ना
अंकल बोले - कल जोगिन्दर की पत्नी और बच्चे घर पर नहीं होंगे,, और अगर तुम
उसके घर आ सकती हो तो फिर सारा दिन तुम्हारी चुदाई वही पर करेंगे...
मुझे जोगिन्दर अंकल के घर का पता था,, मुझे भी लगा की वो बिलकुल सेफ जगह रहेगी चुदाई करने के लिए और पापा का डर भी नहीं रहेगा,,, मैंने झट से हां करदी और फिर खन्ना अंकल पापा के साथ बैठकर दारु पीने लगे,,,
अगली
सुबह जब माँ अपने ऑफिस चली गई और पापा भी अपनी दुकान पर चले गए तो पीछे से
मैं अच्छी तरह से सज संवर कर जोगिन्दर अंकल के घर के लिए निकल पड़ी,, अपने
काले रेशमी बाल खुले छोड़े हुए,,, होंठों पर हलकी सी लाल रंग की लिपस्टिक
लगाए हुए,,, टॉप और स्कर्ट पहने हुए जब मैं अंकल के घर पहुंची तो जोगिन्दर अंकल दरवाजा खोलते ही मुझे देखते रह
गए,,, टॉप और टाइट ब्रा में से आधे बाहर निकले हुए बूब्स और उनके बीच
वाली गहरी दरार को देखते हुए अंकल ने मुझे खींच कर अपने सीने से लगा
लिया,,, और मेरे आधे बाहर निकले हुए मम्मों को चुम लिया,,,
मैंने मुस्कराते हुए कहा - अंकल,, अंदर भी लेकर चलोगे या फिर यही दरवाजे में खड़े खड़े चोदने का इरादा है,,
अंकल
ने अपने तने हुए लंड को मेरी झांघों के साथ रगड़ते हुए कहा - क्या लग रही
हो शालू,,, पूरा पटाखा माल बन कर आई हो,, तुमको देखकर ही साला लंड खड़ा हो
गया है,,, मन तो करता है अभी लंड के ऊपर बिठा लूँ,,, (अंकल ने साथ ही मेरे
मोटे चूतड़ों को दबाते हुए कहा )
मैं हँसने
लगी और फिर अंकल मुझे एक रूम की तरफ ले गए,,, जैसे ही मैं रूम के अंदर घुसी
मेरे पाऊँ के नीचे से जमीन निकल गई,, वहां खन्ना अंकल के साथ दो और मर्द बैठे दारु पी रहे थे,, जो मेरे पापा के भी दोस्त थे,, अजीत अंकल
और शारद अंकल,,,, वो पहले भी कई बार हमारे घर आ चुके थे,, मगर आज मैंने
काफी टाइम बाद उनको देखा था,, शायद पापा के साथ उनका कोई झगड़ा हो गया था तो
उसके बाद उन्होंने हमारे घर आना बंद कर दिया था,,
मुझे
देखते ही खन्ना अंकल मेरे पास आ गए और मुझे अपनी जफ्फी में लेते हुए बोले -
अरे आयो शालू,,, तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे हम,,, वाह यार !!!!,, क्या
लग रही हो तुम,,,
मैंने अंकल की जफ्फी से बचते हुए उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा - अंकल,, यह सब क्या है,,,
खन्ना
अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ रखते हुए और मुझे अपनी ओर खींचते हुए कहा - अरे
शालू,,, यह भी तुम्हारे अंकल ही हैं,,, तुम्हारा पापा भी जानते हैं इनको,,
बहुत ही भले लोग हैं,,,,
फिर खन्ना अंकल ने
अजीत और शारद अंकल की तरफ देखते हुए कहा - अरे भाइयो,, तुमने पहचाना क्या
हमारी शालू को,, देखो तो कितनी जवान हो गई है ,,,, (साथ ही खन्ना अंकल ने
मुझे पीछे से अपनी बाहों में कस लिया)
फिर अजीत अंकल उठ कर मेरे पास आ गए और बोले - अरे वाह शालू कितनी बड़ी हो गई हो तुम,, क्या माल निकली है यार तुम तो,,, बिलकुल अपनी माँ की तरह पटाखा हो (अजीत अंकल ने मेरे बिखरे हुए बालों में अपना हाथ घुमाते हुए कहा..)
मैं उनसे बचने के लिए थोड़ा पीछे हट गई,, मगर मेरे पीछे खड़े खन्ना और जोगिन्दर अंकल ने मुझे फिर से आगे धकेल दिया और बोले - अरे,, अपने अंकल से मिल तो लो,,, डर क्यों रही हो,,
मुझे अब सब समझ आ गया था,,, की इन चारों ने मिलकर मुझे चोदने का प्लैन बनाया है,, मगर मैं चार चार लौडों से चुदवाने के बारे में सोच कर ही डर रही थी,,, मैंने अपने आप को छुड़वाते हुए कहा - मुझे घर जाना है अंकल,,, प्लीस छोड़ो मुझे,,, जाने दो,,,
मगर अजीत अंकल ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मेरे बदन को मसलते हुए बोले - अरे चली जाना मेरी जान,,, इतनी भी क्या जल्दी है,, थोड़ी देर बैठो ना हमारे पास,,,, और फिर अजीत अंकल खुद सोफे पर बैठ गए और मुझे भी अपनी गोद में गिरा लिया,,,,
फिर अजीत अंकल ने मेरी स्कर्ट को खींच कर ऊपर
कर दिया और मेरी मदमस्त मखमली झांगें उनके सामने नंगी हो गई , मेरी काले
रंग की स्कर्ट के नीचे मेरी पिंक रंग की पैंटी भी साफ़ दिखने लगी थी,,, अजीत अंकल ने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत के होंठों को अपनी मुठी में भर लिया,,,, चूत के ऊपर
किसी मर्द का हाथ पड़ते ही मैं सिहर उठी,,, मजा तो बहुत आया था.. मगर यह चार
लोग मिलकर मेरी चूत का क्या हाल करेंगे,,, यह सोच कर मैंने अपनी टांगों को
भींच लिया,, सभी मेरी
तरफ देखकर हँस रहे थे,, मगर मैं अजीत अंकल की बाहों में फड़फड़ा रही थी और अपने आप को छुड़वाने की कोशिश कर रही थी,,,
तभी शारद अंकल
बोले - अरे,, हटो यार,,, इतनी खूबसूरत लड़की के साथ कोई ऐसा विवहार करता
है क्या ,, और फिर शरद अंकल ने मुझे अजीत अंकल की बाहों से छुड़वाते हुए
सोफे पर अपने पास बिठा लिया और कहा - इधर बैठो तुम शालू,, आराम से,, और तुम
घबराओ मत,,, तुम्हारी मर्जी के बिना कोई कुछ नहीं करेगा तुम्हारे साथ,, और
फिर शरद अंकल ने सभी को अपनी अपनी जगह पर बैठने को कहा,,,
मैंने शारद अंकल की तरफ देखते हुए सहमी हुयी आवाज मे कहा - प्लीस अंकल,, मुझे घर जाने दो,, मैं यहाँ नहीं रुकना चाहती,,,
तो
शारद अंकल बोले - हाँ हाँ,,, शालू ठीक है तुम चली जाना,, मगर कुछ देर तो
हमारे साथ बैठ सकती हो ना,,, और हम ने तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लिया
है,, वो भी तो तुमको देना है,,,
मैंने फिर से कहा - नहीं,, अंकल मुझे कोई गिफ्ट नहीं लेना,,, आप मुझे जाने दो,,
मगर
तभी शारद अंकल ने एक लिफाफा पकड़ा और मेरे सामने रख दिया और बोले - ठीक है
शालू अगर तुम नहीं रुकना चाहती तो,,, तुम जा सकती हो,,, और यह अपना गिफ्ट
भी ले जाओ,,, घर जाकर देख लेना,,, मगर एक बात मैं तुमसे पूछना
चाहूंगा,,,''' अगर तुम जोगिन्दर और खन्ना से सेक्स के मजे ले सकती हो तो हम
दोनों में क्या बुराई है,, हम इतने भी बुरे नहीं हैं,,,,
मैंने
अपने सर को झुकाये हुए कहा - आप बुरे नहीं हो अंकल, मगर मैं ऐसी लड़की नहीं
हूँ,, ममम..मैं... एक सा...साथ.. च.. चार लोगो से नहीं कर सकती,,, (मैंने
कुछ झिझकते और शरमाते हुए कहा)
फिर
अजीत अंकल बोले - चार से नहीं,,, मगर दो से तो कर सकती हो ना,,, आज भी तो
तुम इन दोनों से ही करवाने आई हो,,, (अंकल ने मेरी तरफ देख, मुस्कराते हुए
कहा)
मैंने कुछ झिझकते हुए कहा - मगर,,,आ..आप तो चार हो ना,,,,
अजीत
अंकल ने खन्ना और जोगिन्दर अंकल की तरफ हाथ करते हुए कहा - इन दोनों को तो
तुम बहुत मजे दे चुकी हो,,, आज हम दोनों को दे दो,,, क्यों भाई ठीक है
ना,, (अजीत अंकल ने खन्ना और जोगिन्दर अंकल को पूछते हुए कहा)
खन्ना
और जोगिन्दर अंकल दोनों एक साथ बोल पड़े - हाँ हाँ,, भाई ठीक है,,, हम
दोनों फिर किसी दिन मजे लूट लेंगे,, आज तुम दोनों ऐश करो,,, हम तो यहाँ
बैठे बैठे तुम लोगो को देखकर ही मजे ले लेंगे,,,,
फिर शारद अंकल ने मेरी झांग पर हाथ रखते हुए कहा - हाँ तो फिर बोलो शालू,, हमें भी अपनी जवानी का रस चखने दोगी जा नहीं,,,,
मैंने कुछ शरमाते हुए कहा - ठीक है अंकल,,, मगर मैं दोनों से एक साथ नहीं करुँगी,,, बारी बारी करुँगी,,,
मेरी
बात सुनकर अजीत और शारद अंकल दोनों ही खुश हो गए और बोले - यह हुयी ना
बात,,,, तुम जैसा कहोगी वैसा ही होगा,,,, बस अच्छे से मजे देना हम को भी...
(मैंने भी मुस्कराते हुए हाँ में सर हिला दिया)
फिर जोगिन्दर अंकल बोले - हाँ तो,, ठीक है यार,, इसी ख़ुशी में एक एक पैग हो जाये अब,,, जोगिन्दर ने पांच गिलास में पैग डालते हुए कहा ,,, मुझे पता था की पांचवां पैग मेरे लिए है,, और एक आधा पैग तो मैं घर में पापा से चोरी कई बार लगा चुकी थी,, और आज तो मुझे चार लोगो को सामने नंगी भी होना था,, इस लिए पैग लगाना ही बेहतर था मेरे लिए,,, हम सभी ने एक साथ पैग उठाया और ख़तम कर दिया,,,
चारों के चारों दोस्त ही मुझे पैग
लगाते देख हैरान हो गए,,,, खन्ना अंकल बोले - अरे शालू,,, तुम भी पैग लगा
लेती हो,, हमें तो पता ही नहीं था,, आज से हम तुम्हारे पापा के साथ नहीं,,
तुम्हारे साथ बैठ कर ही पैग लगाया करेंगे,,,,
मैंने मुस्कराते हुए कहा - अंकल,, बस एक ही पैग लगाती हूँ,, उस से ज्यादा नहीं,,,,
अजीत
अंकल मेरे पास बैठते हुए बोले - वाह! शालू,,, तुम तो बिलकुल अपनी माँ पर
गई हो,,, वो भी पैग लगवा कर खूब मजे से चुदवाती है,,, (और साथ ही अंकल ने
मेरे गले में हाथ डालते हुए मुझे अपनी ओर खींच लिया,,, )
मैं
भी अब उनके सामने खुल चुकी थी,, मैं उनकी गोदी में झुक गई और बोली - अच्छा अंकल,, आप मेरी माँ को कैसे जानते हो,,,
अजीत
अंकल बोले - सिर्फ जानते ही नहीं,,, जानेमन,,,, हम दोनों ने तो तुम्हारी
माँ की चुदाई भी की है,,, और एक बार तो तुम्हारे पापा ने हमें तुम्हारी माँ
की चुदाई करते वक़्त देख भी लिया था,, बस उसी दिन से तुम्हारे घर जाना बंद
हो गया हमारा,,
मैंने कहा - अच्छा अंकल,,, पहले मेरी माँ को चोदा है और अब मुझे भी चोदना चाहते हो आप ,,,, (मैंने मुस्कराते हुए कहा)
अजीत
अंकल ने मुझे अपनी बाहों में कस्ते हुए कहा - हाँ जानेमन,,,, तुमको देखकर
तुम्हारी माँ की चूत याद आ रही है,,,, बस अब जल्दी से चुदवा लो मुझसे,,,,
और इंतजार नहीं होता मुझसे .... और फिर अंकल ने मुझे अपनी बाहों में उठा
लिया और बैड के ऊपर लिटा दिया
अजीत अंकल भी मेरे ऊपर आकर लेट गए और मेरे होंठों को चूसने लगे और साथ
ही मेरे बूब्स को दबाने लगे,,, उन्होंने मेरे टॉप और ब्रा को खोल दिया,,,
मेरे मोटे मोटे बूब्स को अंकल मुंह में लेकर चबाने लगे और मैं उनके नीचे
मचल मचल कर उनके बदन पर अपना हाथ घुमाने लगी....,,
मैंने
उन तीनों की ओर देखा तो वो सभी अपने पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा
रहे थे,,, अजीत अंकल मुझे अपनी बाहों में जकड़े हुए कभी खुद मेरे ऊपर आ जाते
और कभी मुझे अपने ऊपर कर लेते,, फिर अंकल ने खड़े होकर मेरी स्कर्ट और
पैंटी को खींच कर उतार दिया और अपने भी सारे कपडे उतार दिए,,, अब मैं उन
चारों के सामने नंगी बिस्तर पर लेटी हुयी बारी बारी सब की तरफ देख रही
थी,, और वो अपने लंड को पकडे हुए मेरी तरफ देख रहे थे ,,,
फिर अजीत अंकल ने एक कंडोम का पैकेट निकाला और अपने लंड पर चढ़ा लिया,, फिर उन्होंने मेरी दोनों टांगों को चौड़ा किया
और अपना मोटा और काला लंड मेरी चूत के होंठों पर रख दिया,,, मेरी चूत भी
कितने दिनों से लंड लेने को तड़प रही थी,,, अंकल ने अपने लंड को मेरी चूत के
ऊपर सैट किया और जोर से धक्का लगाते हुए अपना आधा लंड मेरी चूत में घुसा
दिया,,, मेरी गीली चूत में झट से अंकल का लंड घुस गया,, मैं आहें भरती हुयी
अपने चूतड़ों को हिलाने लगी,, अजीत अंकल ने मेरी पतली कमर को अपने दोनों
हाथों में लेते हुए एक और झटका लगा दिया और फिर उनका पूरा लंड मेरे अंदर
घुस गया,,,, मैं और भी जोर जोर से चिलाने लगी,,
अब
अंकल मुझे जोर जोर से चोदने लगे,,, मैं चुदाई करवाते हुए उन तीनों की तरफ
भी देख रही थी,, मैंने देखा की शरद अंकल भी अपनी पेंट और कपडे उतार रहे
थे,, और वो बिलकुल नंगे होकर मेरे चेहरे की तरफ आकर बैड पर बैठ गए और अपने
तने हुए लंड को मेरे होंठों पर रगड़ने लगे,,,, हालाकि मैंने बारी बारी चुदाई
करवाने के शर्त रखी थी,, मगर शारद अंकल का नरम विवहार देखकर मैं उनको मना नहीं कर पाई और उनके लंड को भी अपने मुंह में लेकर चूसने लगी,, अब मैं दोनों तरफ से चुद रही थी,,,
फिर अजीत अंकल ने मुझे घोड़ी बनने को कहा तो मैं बैड के ऊपर ही अपने चूतड़ों को उठा कर घोड़ी बन गई,,, अजीत अंकल ने मेरे चूतड़ों को मसला और फिर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया,, मैंने फिर से शारद अंकल का लौड़ा अपने मुंह में ले लिया और वो भी मेरे लटकते हुए बूब्स के साथ खेलने लगे,,,,
खन्ना अंकल और जोगिन्दर अंकल भी पैंट में से अपना लंड निकाल कर हिलाते हुए मेरे पास आ गए,, जोगिन्दर अंकल बोले - मेरी शालू रानी,, हमें चूत का मजा तो नहीं देने वाली तुम,, कम से कम हमारे लंड को अपने हाथ में लेकर इसका पानी ही निकाल दो,, मुझे भी उन दोनों पर तरस आ गया और मैंने उन दोनों के लंड भी अपने दोनों हाथों में पकड़ लिए,,, अब मुझे वो पोर्न मूवीज याद आ रही थी जो कॉलेज के एक लड़के ने मुझे अपने फ़ोन में दिखाई थी,, उसमें भी एक लड़की ऐसे ही चार-पांच मर्दों से चुद रही होती है,,
अजीत अंकल पिछले आधे घंटे से मुझे चोद रहे थे,,, उनके चोदने की रफ़्तार भी तेज हो चुकी थी और फिर उन्होंने जोर जोर के झटके लगाते हुए अपना सारा माल निकाल दिया,,,
अब शरद अंकल ने भी अपने लंड पर कंडोम चड़ाया और बिस्तर पर लेट कर मुझे अपने ऊपर बिठा लिया, मैं शारद अंकल के खड़े लंड के ऊपर बैठ गई,,, उनका लंड भी एक ही झटके में पूरा मेरी चूत में घुस गया और मैं भी उछल उछल कर उनका लंड अपनी चूत में लेने लगी,, जोगिन्दर और खन्ना अंकल के लंड अभी भी मेरे हाथ में ही थे और वो मेरे बूब्स और बदन को भी अपने हाथों से मसल रहे थे,,
अब अजीत अंकल मेरे मुंह के सामने आ गए और अपना लंड मेरे मुंह के सामने कर दिया,, उनके लंड के साथ वीर्य से भरा हुआ कंडोम अभी भी लटक रहा था,,, मैंने अपने हाथ से कंडोम को खींच कर निकाल दिया और फिर अंकल के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी,,
अजीत अंकल भी मेरे बालों में अपना हाथ घुमाते हुए मेरे मुंह में अपना लंड ठूसने लगे,, मुझे अपने आप पर यकीन नहीं हो रहा था की इस वक़्त चार मर्द मेरे जिस्म के साथ खेल रहे थे,,, जिनसे मैं कुछ देर पहले डर रही थी,,
अब शारद अंकल ने भी मुझे घोड़ी बना लिया और वो भी मुझे पीछे से चोदने लगे,,, मेरे सामने तीन लंड थे और मैं सभी को बारी बारी मुंह में लेकर चूस रही थी,, चारों मर्द मेरे बदन को मसल रहे थे,, और मैं मदमस्त हुयी उनको सब कुछ करने दे रही थी,,, खन्ना अंकल और जोगिन्दर अंकल भी बारी बारी मेरे मुंह में अपना लंड ठूस रहे थे,,,आखिर शारद अंकल ने भी जोर जोर के झटके लगते हुए अपना सारा वीर्य मेरे
अंदर ही निकाल दिया,, हालाकि शारद अंकल ने कंडोम पेहना हुआ था,, इस लिए
मुझे घबराने की जरूरत नहीं थी,, जैसे ही शारद अंकल ने अपना लंड मेरी चूत
में से निकाला,,,, खन्ना अंकल ने भी अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया,,,
मैं दो मर्दों से चुदवा कर थक चुकी थी,, मगर फिर भी लंड लेने को
मेरी चूत
अब भी तैयार थी,,, मैं खन्ना अंकल की तरफ मुस्करा कर देखने लगी,, और वो भी
मेरी सहमती देखकर खुश हो गए,,,
शारद अंकल ने भी अपना लंड मेरे मुंह
में घुसा दिया और अजीत अंकल हाथ में एक पैग लिए हुए मेरे पास आ गए और मुझे
बोले - यह ले रानी,, थक गई होगी,, एक घूंट मार ले,,,, थक तो मैं गई थी,,,
इस लिए मैंने शारद अंकल का लंड मुंह से निकाला और पैग को मुंह लगा लिया,,
और फिर से शारद अंकल और जोगिन्दर अंकल के लंड को चूसने लगी,,
ऐसे ही खन्ना अंकल के बाद जोगिन्दर अंकल ने भी अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मैं ना ना करते हुए भी उन चार मर्दों से चुद गई,, चुदाई के बाद मैंने अपना गिफ्ट खोल कर देखा तो उस मे एक बढ़िया सा एंड्राइड मोबाइल था,, जिस को देखकर मैं बहुत खुश हो गई,,, और मैंने खुश होकर उन चारों मर्दों से उसी दिन एक बार और चुदाई करवा ली,,, मगर सच में उस दिन मेरी चूत का बैंड बज गया था,, चलना भी मुश्किल हो रहा था,, घर आते वक़्त कुछ लड़कों ने तो कॉमेंट भी कर दिया की किस से चुदवा कर आ रही हो,,, अब मैं उनको क्या बताती,, की चार चार मर्दों से चुद कर आ रही हूँ,,,



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