मेरी बिगड़ी हुई चाल

लेखिका - कोमलप्रीत कौर

हैलो दोस्तो,,, कोमल की कोमल चूत की तरफ से आप सभी को नमस्ते।


मैं आपको बता दूँ कि मैंने शादी के बाद अपने पति के अलावा पहली बार अपने एन आर आई बुड्ढे आशिक से अपनी चूत चुदवाई थी।

जिस के बारे में मैने अपनी पहली कहानी मेरी तंग पजामी में बताया था

मेरी फिगर के बारे में भी आपको पता है कि मेरा गोरा बदन, पतली कमर, लम्बे रेशमी बाल, कसे हुए चूतड़ और मोटे चूचों को देख देख लड़के तो क्या बूढ़े भी मुठ मारने के लिए मजबूर हो जाते है। मैं शादीशुदा हूँ और मेरे पति आर्मी में हैं।

मेरा एन आर आई बुड्ढा आशिक थोड़े दिनों में ही वापिस अमेरिका जाने वाला था इसलिए उसने मुझे फिर आखरी बार मिलने के लिए कहा।
अब तक मुझे भी उसके लौड़े की जरूरत महसूस हो रही थी इसलिए मैं अपने ससुराल में मायके जाने का बहाना बना कर जालन्धर अपने आशिक के पास चली गई।
उसके बाद मुझे अपने मायके भी जाना था,,,,, जो जालन्धर के पास ही था तो वहाँ से मुझे कोई परेशानी भी नहीं थी जाने की।

मैंने उस दिन उसी की दी हुई साड़ी पहनी थी और खूब सैक्सी लग रही थी।
वो बस स्टैंड पर गाड़ी लेकर आया और घर जाते समय गाड़ी में ही मेरी जांघ पर हाथ घुमाने लगा।
मैं भी मौका देख कर पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहलाने लगी।

बंगले में पहुँचते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और अन्दर ले गया। उसने मुझे कोल्ड ड्रिंक दिया और खुद बीयर पीने लगा।

फिर उसने मुझे कहा- कोमल, तुम भी बीयर का स्वाद लेकर देखो, इसमें कोई नशा नहीं है।
पहले तो मैंने मना कर दिया मगर उसके ज्यादा जोर डालने पर मैंने थोड़ी सी बीयर ले ली।

हम दोनों सोफे पर बैठे थे और उसने वहीं पर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया। मैं भी उसका साथ देने लगी। उसने फिर एक जाम बनाया और उसमें थोड़ी सी शराब भी मिला दी। मैंने भी सोचा कि थोड़ी सी है, इससे क्या होगा, और मैंने पूरा जाम ख़त्म कर दिया।

हम दोनों आपस में लिपटे हुए थे। वो कभी मेरी चूचियों को मसल रहा था और कभी मेरी गाण्ड पर हाथ फेर रहा था। मेरी साड़ी का पल्लू भी नीचे गिर गया था और मेरे ब्लाउज में से दिख रहे गोल गोल मम्मो पर वो अपनी जीभ रगड़ रगड़ कर चाट रहा था।,,,,, मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी।

उसका लण्ड एकदम सख्त हो चुका था।
मैं सोफे पर ही घोड़ी बन गई और उसके लण्ड की तरफ अपना मुँह करके उसकी पैन्ट खोल दी।
उसने भी अपने चूतड़ उठा कर अपनी पैन्ट उतार दी। उसके कच्छे में उसका लण्ड पूरा तना हुआ था।
मैंने उसका लण्ड बाहर निकाला और अपने हाथों में ले लिया।

वो भी मेरे लम्बे बालों में हाथ घुमाने लगा। मैंने उसके लण्ड को चूमा और फिर अपने नर्म-नर्म होंठ उस पर रख दिए। मानो जैसे मैंने किसी गरम लोहे के लठ्ठ को मुँह में ले लिया हो। मैं उसका लण्ड पूरा मुँह में ले रही थी। लप-लप की आवाजें मेरे मुँह से निकल कर कमरे में गूंज रहीं थी।

वह भी मेरे सर को ऊपर से दबा दबा कर और अपनी गाण्ड उठा उठा कर अपना लण्ड मेरे मुँह में ठूँस रहा था। उसके मुँह से भी आह आह की आवाजें निकल रही थी।

वो बोला- चूस ले रानी! और चूस! बहुत मज़ा आ रहा है।
मैंने कहा- क्यों नहीं ! आज मैं रस पीने और पिलाने ही तो आई हूँ।

फिर उसने मेरे बालों को मेरे चेहरे पर बिखेर दिया और मुझे बाहर कुछ भी नहीं दिख रहा था। सिर्फ मेरे सामने उसका लण्ड था।
एक तरफ उसका पेट और दूसरी तरफ मेरे काले घने बाल थे। मैं उसका लण्ड लगातार चूसे जा रही थी।

फिर उसने मेरी पीठ पर से मेरा ब्लाउज खोल दिया और दूर फेंक दिया। फिर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया, जिसके खुलते ही मेरे दो बड़े बड़े कबूतर उसकी टांग पर जा गिरे और उसने भी अपना हाथ मेरे दोनों कबूतरों पर रख दिए।
वो मेरी और सीधा हो कर बैठ गया और मेरे चूचों को जोर जोर से मसलना चालू कर दिया।

उसका हाथ कभी मेरे बूब्स पर, कभी मेरी पीठ पर और कभी मेरी गाण्ड पर चल रहा था।
फिर उसने मेरी साड़ी उतार कर मेरा पेटीकोट खोल दिया।

मैंने भी एक हाथ से उसको निकाल दिया और एक तरफ फ़ेंक दिया। अब मेरे बदन पर एक पेंटी ही बची थी उसने उसको भी उतार दिया। मगर मेरी पेंटी उतारते समय वो जरा सा भी आगे नहीं हुआ। मैं हैरान थी कि उसने मेरी पेंटी मेरी गाण्ड से बिना हिले कैसे नीचे कर दी।

अभी मैं सोच ही रही थी की मेरी पेंटी जो अभी जांघों पर थी, में दो ऊँगलियाँ घुसी और मेरी पेंटी और नीचे जाने लगी और मेरे घुटनों पर आकर रुक गई। मुझे लगा कि जैसे किसी और मर्द ने मेरी पेंटी उतारी हो।

मैंने झटके से सर को उठाया और पीछे मूड़ कर देखा तो मैं हैरान रह गई। वहाँ पर एक और बुड्ढा कच्छे और बनियान में खड़ा था।

मैंने फिर अपने आशिक की तरफ देखा तो वो बोला- जाने मन… सॉरी, मैंने तुम्हें अपने इस दोस्त के बारे में बताया नहीं। दरअसल यह कल से मेरे घर में है और आज जब सुबह तूने मुझे बताया कि तुम मुझसे मिलने आ रही हो तो मैंने इसे भेजने की कोशिश की मगर शायद इसने हमारी बातें सुन ली थी इसलिए यह मुझसे बोला कि एक बार इसे भी चूत दिला दूँ, काफी अरसे से चूत नहीं मारी।

मुझे इस पर तरस आ गया।

उसने कहा- जान, मैं तुम्हें रास्ते में ही इसके बारे में बताने वाला था मगर डर गया कि कहीं तुम रूठ कर वापिस न चली जाओ, इसलिए घर आकर सोचा कि पहले मैं तुमसे मज़े कर लूँ फिर इसके बारे में बताऊँगा, मगर यह साला अभी आ गया।

मैं अभी कुछ बोली नहीं थी कि वो दूसरा बुड्ढा बोल पड़ा- यार क्या करता? इसकी मस्त गाण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया। और फिर मेरी तरफ देखता हुया बोला,, - प्लीज़ कोमल,,, मुझे भी खुश कर दो,, मुझे भी दे दो अपनी चूत का मज़ा,,, देखना तुम,,, मैं भी तुम्हे बहुत मज़ा दूँगा,

वो दोनों अब मेरे मुँह की तरफ देख रहे थे कि मैं क्या जवाब देती हूँ।

मगर मैंने जो शराब पी थी उसका नशा मुझ पर चढ़ने लगा था और फिर अगर मैं उस वक्त मना भी करती तो फिर भी वो दोनों मुझे नहीं छोड़ते और मुझे जबरदस्ती ही चोद लेते।

मैंने उस दूसरे बूढ़े की ओर देखा। उसकी सेहत भी कोई खास नहीं लग रही थी। मैंने सोचा कि इसका लण्ड या तो खड़ा ही नहीं होगा या फिर दो मिनट से ज्यादा नहीं टिकेगा।

इसलिए मैंने कहा- कोई बात नहीं, मुझे तुम दोनों इकट्ठे ही मजा दो। मैं तुम दोनों को आज खुश कर दूंगी।

वैसे भी अगर मैं उनकी बात नहीं मानती तो मेरी चूत भी प्यासी रह जाती जो मुझे कभी गंवारा नहीं था।


मेरी बात सुनते ही वो दोनों फिर से मुझ पर टूट पड़े। एक मेरे मम्मो को और दूसरा मेरी पेंटी उतार कर (जो अभी तक घुटनों पर ही थी) मेरी गाण्ड को सहलाने लगा।

मैं भी अपना काम चालू रखते हुए फिर से लण्ड को चूसने लगी। हमारी बातचीत में लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था जो फिर से जोश में आ रहा था।

थोड़ी ही देर में मुझे दोनों लण्ड पूरे तने हुए महसूस होने लगे। एक मेरी जांघों पर और दूसरा मेरे मुँह में था।

अब मुझे दूसरे बूढ़े का लण्ड देखने की इच्छा होने लगी। जिसे मैंने सोचा था कि खड़ा ही नहीं होगा। तभी पहले वाले लण्ड में हलचल होने लगी और वो बुड्ढा जल्दी जल्दी मेरे मुँह को चोदने लगा।

मैं भी जोर जोर से उसके लण्ड को अपने हाथों और मुँह में लेने लगी। फिर उसका भरपूर माल मेरे मुँह में था। मैं उसको चाट गई।

उधर दूसरा बुड्ढा जो मेरी चूत और गाण्ड को चाट रहा था, ने भी अपनी जुबान का कमाल दिखाया और मेरी चूत में से पानी निकल गया। मेरी चूत में से निकल रहे पानी को वो चाट रहा था।
इससे मुझे कुछ थकावट महसूस हुई और मैं सोफे पर ठीक से बैठ गई।

एक लण्ड तो ढीला हो गया था मगर दूसरे में अभी दम था। वो बुड्ढा अपना नंगा लण्ड मेरे मुँह के सामने ले कर खड़ा हो गया। उसका लण्ड मैं सोच रही थी कि ज्यादा बड़ा नहीं होगा मगर सात इन्च का लण्ड देख कर मैं हैरान रह गई। बूढ़े की सेहत कमजोर थी मगर उसके लण्ड की नहीं।

मैंने अभी उसका लण्ड हाथ में पकड़ा ही था कि मेरे सामने एक और जाम लेकर वो पहले वाला बुड्ढा खड़ा था।

मैंने भी बिना सोचे समझे जाम हाथ में ले लिया। मैं जानती थी कि इसमें भी शराब है। मगर पता नहीं मुझे नशा हो रहा था।

मैंने उस बूढ़े का लण्ड जाम में डुबो दिया और फिर बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी। मैं बार बार ऐसे कर रही थी और बूढ़े का लण्ड और भी बड़ा होता लग रहा था। फिर मैंने एक ही घूंट में पूरा जाम ख़त्म कर दिया।

बूढ़े ने मुझे अपनी गोद में उठाना चाहा, वो शायद मुझे बेडरूम में उठा कर ले जाना चाहता था। उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा तो लिया मगर चलते ही लड़खड़ाने लगा,,। तभी पहले वाला बुड्ढा भाग कर आया और मुझे संभलता हुया बोला- अरे यार, संभल के! बहुत कोमल माल है, कहीं गिर गया तो दुबारा ऐसा माल नही मिलेगा हमें,,,

फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और बेडरूम में ले गये,,,,  मैं उन दोनों की बाहों में बिल्कुल नंगी पड़ी ऐसे  झूम रही थी,, जैसे कोई छोटी सी बच्ची हूँ,,,  फिर उन्होंने मुझे बैड पर लिटा दिया।

मैंने दोनों लण्डों की तरफ देखा। एक लण्ड अभी भी ढीला था और दूसरा अभी पूरा कड़क।

दूसरे बूढ़े ने मेरा सर पकड़ा और अपनी तरफ कर लिया। मेरा पूरा बदन बेड पर था मगर मेरा सर बैड से नीचे गिर रहा था मगर मेरा मुँह ऊपर की तरफ था। मेरे मुँह के ऊपर बूढ़े का लण्ड तना हुआ था।

मुझे पता था कि अब क्या करना है।

बूढ़े ने अपना लण्ड मेरे चेहरे पर घुमाते हुए मेरे होंठों पर रख दिया। मैं भी अपने होंठों से उसको चूमने लगी और अपने होंठ खोल दिया। बुड्ढा भी समझदार था।

उसने एक हाथ से मेरे सर को सहारा दिया और अपना लण्ड मेरे होंठों में घुसा दिया और फिर अन्दर-बाहर करने लगा जैसे किसी गोल खुली हुई चूत में लण्ड घुसाते हैं।

फिर उसने मेरे सर को छोड़ कर मेरे दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। मेरा सर और लंबे बाल बैड से नीचे लटक रहा थे और उस पर बूढ़े के लण्ड के धक्के, उसके दोनों हाथ मेरे मम्मो को मसल रहे थे।

अब दूसरा बुड्ढा भी बैड पर आ गया और मेरी टाँगे खोल कर मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया। वो मेरी चूत के ऊपर शराब डाल रहा था और फिर उसे चाट रहा था। कभी कभी वो मेरे पेट पर मेरी नाभि में भी शराब डाल कर उसे चाटता।

उसकी जुबान जब मेरी चूत के अन्दर जाती तो मचल कर मैं अपनी गाण्ड ऊपर को उठाती मगर ऐसा करने से मेरे मुँह में घुस रहा लण्ड और आगे मेरे गले तक उतर जाता।

फिर उन दोनों ने मुझे पकड़ कर बैड पर ठीक तरह से लिटा दिया। अब दूसरा लण्ड भी कड़क हो चुका था और पहले वाला तो पहले से ही कड़क था।

अब मेरी चूत की बारी थी चुदने की। मैं बैड पर अभी ठीक से बैठ ही रही थी कि वो सेहत से कमजोर बुड्ढा मुझ पर टूट पड़ा और मुझे नीचे लिटा कर खुद मेरे ऊपर आ गया।

मेरी चूत तो पहले से लण्ड के लिए बेकरार हो रही थी। इस लिए मैंने भी अपनी टाँगें ऊपर उठाई और उसने अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धक्का मारा। उसका लण्ड मेरी चूत की दीवारों को चीरता हुआ आधा अंदर घुस गया।

मैं इस धक्के से थोड़ी घबरा गई और अपने आप को सँभालने लगी। मगर फिर दूसरे धके से  उसका पूरा लण्ड मेरी चूत के बीचों बीच सुरंग बनाता हुआ अन्दर तक घुस गया।

मुझे ऐसा लगा जैसे वो मेरी चूत फाड़ देगा,,। मेरे मुँह से निकला- अबे साले, मेरी फाड़ डालेगा क्या… आराम से डाल! मैं कहीं भाग तो नहीं रही!
वो बोला- अरे रानी… तेरी जैसी मस्त भोसड़ी देख कर सब्र नहीं होता… दिल करता है कि सारा दिन तुझे चोदता रहूँ।
मैनें फिर गुस्से में कहा - साले बूढ़े,, क्या लण्ड में इतना दम है कि सारा दिन मुझे चोद सके?

मेरी बात सुनकर वो भी थोड़ा गुस्से से बोला - वो तो साली अभी पता चल जाएगा तुझे! की कितना दम है मेरे लंड में,,, इतना बोलते हुए वो मुझे जोर से चोदने लगा।

मेरी चूत में भी आग दहक रही थी,,, मैं भी उसका साथ कमर हिला-हिला कर देने लगी। लंड और चूत की जंग जोरों पर चल रही थी,,,  मैं उसके नीचे पड़ी ज़ोर ज़ोर से चिला रही थी,,, आहह,,,आहाहह....ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह माआअ,,,म्‍म्म्ममममममममम,,,,,उउउउफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,,,,,,

मेरी ऐसी आवाज़ें सुनकर वो बूढ़ा और भी जोश से मुझे चोदे जा रहा था,,  वो उपर से अपने लंड का धकका मारता और मैं नीचे से अपनी चूत उपर उठा देती,, जिस से उसका लंड जड़ तक मेरी चूत में घुस जाता,,,

आख़िर मेरी चूत में से मेरे वीर्य की फुहारें फूटने लगी,, और मेरी गीली चूत में से फ़च फ़च की आवाज़ें आने लगी,,, उसका लंड भी मेरी चूत के रस से भीग चुका था,,

वो मेरी दोनों टाँगों को अपने कंधों पर रखे हुए,, मेरी चूत में अपना लंड पेले जा रहा था,,, वो मेरी चूत में धक्के मार मार कर तो थक चुका था मगर अभी तक उसके लंड से वीर्य की एक बूँद तक नही निकली थी,,,,

तभी दूसरा बुड्ढा उसको बोला- चल, बस कर यार,,, अब मुझे भी कुछ करने दे।

वो बोला-  नही यार,,, अभी इस साली को मैं और चोदूँगा… इसे बताऊँगा कि मेरे लंड में कितना दम है।

फिर मैं उस बूढ़े के नीचे चुदती हुई बोली - हा,,हा,, ठीक है,,, चल गया पता,,, की बहुत दम है तुम्हारे लंड में,, आज मुझे माएके भी जाना है,, तुम्हारे लंड का दम मैं फिर किसी दिन भी देख सकती हूँ,,,

तो वो बूढ़ा बोला - अगर यह बात है तो फिर ठीक है,,, मगर फिर जल्दी ही मिलने का वादा करना पड़ेगा,,,

मैनें कहा - ठीक है,,, ज़रूर मिलूंगी,, और जल्दी ही मिलूंगी,,, 

मेरी बात सुनकर वो बूढ़ा मेरी चूत से लंड निकालता हुया बोला - ठीक है मेरी कोमल रानी,,, इसी बहाने तेरी चूत तो दुबारा चोदने को मिलेगी,,, और फिर वो मेरे उपर से उतर कर हांफता हुया बैड पर लूड़क गया,,

थक तो मैं भी चुकी थी,, मैनें उठकर पानी पीया और उस एन आर आई बूढ़े के फोन से बर्गर का ऑर्डर कर दिया,,,

एन आर आई बूढ़ा चेयर पर बैठा अपने तने हुए लंड को हिलाता हुया बोला,, अब आ जाओ कोमल,, मेरी गोद में बैठ जाओ,, देखो,, यह मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए कब से तरस रहा है,,, 

मैं उसकी बात सुनकर मुस्कराते हुए उसकी गोद में जाकर बैठ गयी,,, उसकी गोद में बैठते ही उसका हार्ड और डंडे जैसा खड़ा लंड सीधा मेरी चूत में घुस गया,,, लंड चूत के होंठों से रगड़ता हुया अंदर घुस गया और मेरे मुँह से फिर से सिसकारियाँ निकलने लगी,,, 

मैं उसकी गोद में बैठी उछल उछल कर अपनी गीली चूत में उसका लंड अंदर बाहर करने लगी,,वो बूढ़ा आह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह करता हुया मेरे उछल रहे मम्मो को हाथों में लेकर दबोचने लगा,,, 

मैनें आगे झुकते हुए अपने मम्मे की एक चुची उसके मुँह में डाल दी,,, जो उछल उछल कर उसके मुँह पर बजने लगी,, काफ़ी देर तक वो मुझे चेयर पर ही चोदता रहा और फिर उसने अपने लंड का सारा माल मेरी चूत में निकाल दिया,, और उसका सारा वीर्य मेरी चूत से निकल निकल कर मेरी झंघों पर बहने लगा,,,

उधर दूसरा बूढ़ा भी हमे देख कर अपना लंड हिला रहा था,, जैसे ही मैं एन आर आई बूढ़े की गोद से उठी,, दूसरे बूढ़े ने फिर से मुझे खड़े खड़े ही अपने साथ चिपका लिया और खड़े खड़े ही मेरी एक टाँग उठा कर मेरी चूत में अपना लंड घुसेड दिया,,, 

मैं भी एक दीवार का सहारा लेकर उस से खड़े खड़े ही चुदवाने लगी,, वो मेरी एक टाँग को पकड़े हुए ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत में धक्के मारने लगा,, ऐसे चुदने से मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था,, और फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गये,,

फिर दरवाजे की घंटी बजी,, और एन आर आई बूढ़ा पाजामा पहन कर बर्गर लेने चला गया, उसके बाद हम तीनों ने बैठकर बर्गर खाए और कोल्ड ड्रिंक पीया,,  और फिर दुबारा चुदाई के लिए तैयार हो गये,,

मगर अब की बार उस एन आर आई बूढ़े ने मुझे अपनी गांड चुदवाने को कहा,,

मैनें अभी तक किसी से गांड नही चुदवाई थी,, मगर फिर भी उसके ज़्यादा ज़ोर देने पर मैं मान गयी,, उसने मुझे घोड़ी बन जाने को कहा और मैं उसके सामने अपनी गांड उठा कर घोड़ी बन गयी,,

फिर उसने मेरी गांड के सुराख पर कुछ क्रीम लगाई और अपना मोटा लंड मेरी गांड में घुसेड़ने लगा,,, गांड का सुराख इतना टाइट था की थोड़ा सा ही लंड गांड के अंदर घुस पाया,,,

मगर थोड़ा सा लंड ही गांड में जाने से मुझे बहुत दर्द होने लगा,,, मुझे मेरी गांड फटती हुई मालूम हो रही थी,,,, मैने झट से लंड बाहर निकाल दिया,,

उस के बाद उस बूढ़े ने और ज़्यादा क्रीम मेरी गांड पर और अपने लंड पर लगाई और फिर दुबारा मेरी गांड में अपना लंड घुसेड दिया,, इस बार उसका आधा लंड मेरी गांड में घुस गया,, मगर अभी भी बहुत दर्द हो रहा था,,

फिर कुछ देर रुकने के बाद दर्द कम हो गया और धीरे धीरे उस बूढ़े ने अपना सारा लंड मेरी गांड में घुसेड दिया,,, मेरा भी दर्द कम हो चुका था,,

अब मैं भी आगे पीछे होकर लंड के झटके अपनी गांड में मरवाने लगी,,, मुझे गांड चुदाई में भी मज़ा आने लगा था,,  

मैं पहली बार किसी से अपनी गांड चुदवा रही थी,,, क्रीब आधे घंटे तक उसने मेरी गांड में अपना लंड पेला और फिर मुझे बैड पर लिटा कर अपना लंड मेरी चूत में घुसेड दिया,, और फिर से मेरी चूत की चुदाई करने लगा,, 

कुछ देर बाद उसने करवट लेकर मुझे अपने उपर कर लिया और मैं उपर से ही उसके लंड पर अपनी चूत के झटके मारने लगी,, 

मुझे उपर से धक्के लगाते हुए देख वो दूसरा बूढ़ा भी मेरे उपर आकर चढ़ गया और मेरी खुली हुई गांड के सुराख में अपनी उंगली डालने लगा,, उसके ऐसा करने से मुझे और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा,,

फिर उसने मेरी गांड पर क्रीम लगाई और अपना लंड भी मेरी गांड में घुसेड दिया,,,,,

ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,,, मर गयी,,,, मैं तो,,,,,, (मेरे मुँह से अपने आप ऐसे शब्द निकल गये) ,,,,,,दोनों तरफ से मेरे अंदर लंड घुसे हुए थे,, चूत में भी और गांड में भी,,,

मैं दोनों बुड्डों के बीच में फंसी हुई चिलाने लगी-  आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ,,,,, अरे मादरचोद छोड़ दे मुझे… तुम दोनों मुझे मार डालोगे।

मगर उन पर जैसे मेरी बातों का कोई असर नहीं हो रहा था। दोनों ही अपना अपना लंड मेरे अन्दर घुसेड़ रहे थे।

दोनों ही बारी बारी अपना लंड मेरे अंदर बाहर करने लगे,, अगर आगे से लंड बाहर निकलता तो,, पीछे से अंदर घुस जाता और अगर पीछे से बाहर निकलता तो आगे से अंदर घुस जाता,,, 

मैं दोनों बूढ़ों के बीच में सैंडविच बनी हुई आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करते हुई चिला रही थी,, और वो मुझे हौसला देते हुए बोल रहे थे - बस कोमल,,, बस्स्स थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा,,,

मगर मेरे अंदर दो-दो लंड घुसे हुए थे,, और आज ही तो मैनें अपनी गांड का भी उदघाटन करवाया है,, उपर से एक साथ दो-दो लंड मेरी जान निकाल रहे थे,,, 

कुछ देर तक तो मैं ऐसे ही चिलाती रही मगर फिर धीरे धीरे मुझे दोनों लंड ही मज़ा देने लगे,,,,,, मैं अपनी गांड और चूत धक्के मार-मार कर चुदवाने लगी,,,

फिर वो दोनों मुझे  ऐसे ही अपने बीच लिए आगे पीछे से चोदते रहे,, और फिर ऊपर वाले बूढ़े ने मेरी गांड में अपना माल निकाल दिया। गांड में गर्म-गर्म माल गिरते ही गांड का सारा दर्द गायब हो गया,, जैसे किसी ने गर्म पानी से टाकोर कर दी हो,,

उपर वाला बूढ़ा तो फिर से बिस्तर पर लूड़क गया,, और नीचे वाला बूढ़ा फिर से करवट लेकर मेरे उपर आ गया,, और मेरी चूत की ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा,,,

कुछ ही देर में उसका वीर्य भी निकलने वाला हो गया और उसने झट से मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर अपना सारा वीर्य मेरे मम्मो पर, मेरे मुँह पर और मेरे बालों में गिरा दिया,, 

ऐसे ही शाम तक मैं वहाँ पर चुदती रही और फिर वो दोनों मुझे गाड़ी में बिठा कर मेरे मायके गाँव छोड़ने आये। उन्होंने मुझे गाँव से पीछे ही उतार दिया और वहाँ से मैं पैदल अपने घर चली गई। मगर मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था।

मेरी गांड और चूत का बुरा हाल हो रहा था, मेरी बिगड़ी हुई चाल देख कर मुझे मेरी भाभी ने पूछा भी था- क्या बात है?

तो मैंने कहा - बस से उतरते समय पैर में मोच आ गई थी।

फिर मैं चुपचाप बिस्तर में लेट गई। तब जाकर कहीं मेरी चूत और गांड को कुछ राहत मिली,...

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